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हेल्थ डेस्क. बच्चों में कमजोर विजन का कारण क्या है? युवाओं की आंखों में लालिमा, घटती रोशनी और ड्राय आई सिंड्राेम की वजह क्या है? बुजुर्गों में डायबिटिक रेटिनोपैथी के मामले क्यों बढ़ रहे हैं? ऐसे ही कई सवालों के जवाब जानने के लिए भास्कर ने कैटरैक्ट और रिफ्रैक्टिव सर्जन डॉ. प्रशांत सिंह से बात की। डॉ. प्रशांत के अनुसार ज्यादातर मामलों में लोगों की फिजिकल एक्टिवटी कम होना और स्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ना आंखों की दिक्कतों का बड़ा कारण है। एक्सपर्ट से जानिए बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों में कौन से दिक्कतें आम हैं और इनसे कैसे निपटें…

  1. बच्चों में सबसे आम समस्या है रिफ्रैक्टिव एरर। आसान भाषा में समझें तो विजन का न बनना। ऐसे मामलों में बच्चों को चीजें थोड़ी धुंधली नजर आती हैं इसे वे ठीक से समझ नहीं पाते। नतीजतन दिक्कत बढ़ती है समस्या गंभीर होने पर चश्मा लगाने की नौबत आती है। इसकी कई वजह हो सकती हैं।

    एक्सपर्ट ओपिनयन

    • डॉ. प्रशांत के मुताबिक बच्चों को रिफ्रैक्टिव एरर से बचाने के लिए उनकी आउटडोर एक्टिवटीज बढ़ाएं। बच्चा जितना खुली जगह पर समय बिताएगा उतना ही उसे फायदा होगा। दूर की चीजों को देखने से आंखों की रोशनी पर सकारात्मक असर होता है।
    • खानपान में मौसमी फल और पत्तेदार सब्जियों जरूर शामिल करें। आंखों की नमी बरकरार रहे इसके लिए दिन में 8-10 गिलास पानी जरूर पीने को कहें। या चाहें तो उनकी डाइट में लिक्विड चीजों को बढ़ाएं।
  2. स्क्रीन का लगातार कई घंटे तक इस्तेमाल सिरदर्द, आंखों में लालिमा और दर्द का कारण बनता है। इसके अलावा आंखों की नमी भी घटाता है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी का असर आंखों की रोशनी पर भी सीधा पड़ता है। इस कारण इन दिनों कम्प्यूटर विजन सिंड्राेम के मामले बढ़ रहे हैं।

    एक्सपर्ट ओपिनियन

    • लगातार स्क्रीन देखते हुए काम कर रहे हैं तो हर एक घंटे में 5 मिनट का ब्रेक लें और कम से कम 20 फीट दूर तक देखने की कोशिश करें।
    • अगर लगातार काम करना मजबूरी है तो एंटीग्लैयर चश्मे का प्रयोग करें।
    • दिन में 3-4 बार आंखों पर पानी के छीटें मारकर धोएं।
    • आंखों में रुखापन या लालिमा होने पर एक्सपर्ट की सलाह से ल्यूब्रिकेंट ड्रॉप का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  3. 40 साल के बाद साल में एक बार आंखों की जांच कराई जाए तो कई तरह की दिक्कतों को बढ़ने या कारण बनने से रोका जा सकता है। बढ़ती उम्र में ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, डायबिटिक रेटिनोपैथी और हायपरटेंसिव रेटिनोपैथी के मामले सामने आते हैं। जिनके कारण भी अलग-अलग हैं। जैसे डायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह रोगियों में होती है। रेटिना को रक्त पहुंचाने वाली नलिकाएं क्षतिग्रस्त होने के कारण विजन नहीं बन पाता है वहीं हायपरटेंसिव रेटिनोपैथी का कारण ब्लड प्रेशर है।

    एक्सपर्ट ओपिनियन

    • संभव हो तो एक्सरसाइज जरूर करें। ऐसा न कर पाने पर वॉक भी कर सकते हैं। शरीर को एक्टिव रखेंगे तो इसका सीधा असर आंखों की राेशनी पर भी पड़ेगा।
    • साल में एक बार रूटीन चेकअप जरूर कराएं। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने की कोशिश करें।
    • आंखों की रोशनी कम होने पर डॉक्टरी सलाह जरूर लें। रोजाना 10-12 गिलास पानी पीएं, इससे शरीर और आंखों में नमी बरकरार रहेगी।
    • डाइट में मौसमी फल और हरी सब्जियों को शामिल करें और दिन में दो बार आंखों को धोएं।
    • बिना एक्सपर्ट की सलाह के ड्रॉप्स या दवाइयों का इस्तेमाल न करें।
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      common eye problems in kids youngsters and old age people

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