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हेल्थ डेस्क. अंगुलियों, घुटनों और एड़ियों के जोड़ों में दर्द रहता है तो अलर्ट होने की जरूरत है। ये आर्थराइटिस के लक्षण है। देशभर में 22-39 फीसदी लोग इससे परेशान हैं। आम भाषा में इसे समझें तो ज्यादातर मामलों में शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाने पर ऐसा होता है। ऐसी स्थिति में जोड़ों के लिए कुशन का काम करने वाले कार्टिलेज घिस जाते हैं आैर जोड़ों में सूजन और दर्द होने लगता है। विशेषज्ञों के मुताबिक आर्थराइटिस को बढ़ती उम्र का रोग माना जाता है लेकिन आज की स्थिति ऐसी नहीं है। इसके मामले युवाओं में भी बढ़ रहे हैं। जोड़ों में जख्म, इंजरी या संक्रमण के कारण भी आर्थराइटिस हो सकता है।

आर्थराइटिस के कई प्रकार हैं लेकिन भारत में ऑस्टियो आर्थराइटिस सबसे कॉमन है। ऑस्टियो आर्थराइटिस का कारण बढ़ती उम्र, मोटापा, हार्मोन इम्बैलेंस है। आमतौर पर इसमें घुटने, कूल्हे, पैर और रीढ़ की हड्डी सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। हर साल 12 अक्टूबर को वर्ल्ड आर्थराइटिस डे मनाया जाता है ताकि लोगों को इससे बचाव और खतरों की जानकारी देकर जागरूक किया जा सके। जयपुर के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज जैन से जानिए इससे कैसे बचें…

  1. लक्षणों के आधार पर इसके कई प्रकार हैं लेकिन मुख्यत: इसके दो प्रकार हैं ऑस्टियो-आर्थराइटिस और रूमेटाॅयड आर्थराइटिस। इसके अलावा संक्रमण, टीबी और थायरॉयड से होने वाले आर्थराइटिस के मामले भी देखे जाते हैं।

    • ऑस्टियो-आर्थराइटिस :आर्थराइटिस का यह प्रकार ज्यादातर 50 साल के बाद होता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार अब इसके मामले युवाओं में भी देखे जा रहे हैं। इसका बड़ा कारण बिगड़ी लाइफस्टाइल है। यह आमतौर पर घुटनों के दर्द के तौर पर जाना जाता है। रोग की गंभीरता बढ़ने पर अंगुलियों और कूल्हों में भी दिक्कत होती है।
    • रूमैटायड आर्थराइटिस :इसका कारण ऑटोइम्युनिटी है। ऑटोइम्युनिटी यानी जब शरीर को रोगों से बचाने वाला तंत्र ही इसके खिलाफ काम करने लगता है। इसके ज्यादातर मामलों का कारण फैमिली हिस्ट्री है। इसमें लक्षण के तौर पर कोहनी, अंगुलियों, कंधे, टखने में दर्द और अकड़न रहती है। जैसे-जैसे तापमान गिरता है इसके दर्द और अकड़ने में बढ़ृोतरी होती है।
    • टीबी से होने वाला आर्थराइटिस सबसे कॉमन :इसमें टीबी से होने वाला आर्थराइटिस सबसे कॉमन है। यह आमतौर पर किसी एक जोड़ में होता है। इसके अलावा छोटे बच्चों में पस वाला आर्थराइटिस भी होता है। इनके अलावा यूरिक ऐसिड, चोट या थायरॉयड से होने वाला आर्थराइटिस भी होता है।
    • रीढ़ की हड्डी और जोड़ों (कोहनी, अंगुली, टखने, कूल्हे, घुटने) में दर्द, अकड़न या सूजन रहने पर अलर्ट होने की जरूरत है। जोड़ों से अावाज आना या अंगुलियों और दूसरे हिस्सों का मुड़ना भी लक्षण के तौर पर जाना जाता है।
    • ऑस्टियो-आर्थराइटिस उम्र के साथ जोड़ों में होने वाली टूट-फूट की वजह से होता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे बढ़ता मोटापा, क्षमता से अधिक फिजिकल एक्टिवटी, मेनोपॉज, जोड़ों में संक्रमण या चोट, फ्लैट फुट, हाई हील और डायबिटीज हैं।
    • 40 मिनट का वर्कआउट जरूरी : हफ्ते में कम से कम 5 दिन 45-50 मिनट वर्कआउट जरूर करें। कार्डियो के लिए जॉगिंग, ब्रिस्क वॉक, स्विमिंग और साइक्लिंग कर सकते हैं। ब्रिस्क वॉक हर उम्र और हर किसी के लिए सबसे आसान और फायदेमंद है।
    • लगातार एक पोजीशन में न बैठें : बॉडी में मूवमेंट कम हाेना और गलत पॉश्चर इसके बड़े कारणों में से एक है। ऐसी स्थिति में मोटापा बढ़ता है और दर्द व अकड़न में भी इजाफा होता है। ऐसी स्थिति में 30-40 मिनट पर 5 मिनट का ब्रेक लें।
    • डाइट में प्रोटीन व कैल्शियम लें: खानपान में प्रोटीन और कैल्शियम जरूर शामिल करें। प्रोटीन कार्टिलेज में हुए डैमेज को रिपेयर करता है और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसके लिए डाइट में पनीर, दूध, दही, ब्रोकली, पालक, राजमा, मूंगफली, बादाम, टोफू, तिल के बीज,मछली और हरी सब्जियां शामिल करें। दिन भर में 8-10 गिलास पानी पीएं।
    • वजन काबू में रखें : वजन ज्यादा होने से जोड़ों जैसे, घुटनों, टखनों और कूल्हों आदि पर बहुत जोर पड़ता है। बीएमआई 18-23 के बीच रखें।
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