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हाल ही में हुए टीएलएलएलएफ(TLLLF) के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के प्रति व्यापक सहानुभूति हो सकती है। सर्वेक्षण के दौरान ये सामने आया है कि 14% लोगों में मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के प्रति डर की भावनाएं होती हैं जबकि सर्वेक्षण के 28% उत्तरदाताओं ने मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के प्रति घृणा कि भावना दिखाई। वहीं 42% लोग कभी-कभी या हमेशा गुस्से की भावना रखते हैं।

क्यूंकि समाज में मानसिक बीमारी को एक कलंक समझा जाता है, जिस कारण से भारत में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से पीड़ित केवल 10 -12% लोग ही सहायता पाने के लिए सामने आते हैं। पीड़ित लोगों के सामने न आने के और भी मुख्य कारण हैं जैसे मानसिक बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी और पेशेवर सहायता का सीमित होना।

दी लिव लव लॉफ फाउंडेशन (TLLLF) ने अक्टूबर 2018 के पहले सप्ताह में एक राष्ट्रव्यापी जन मीडिया अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य डिप्रेशन से जुड़े कलंक को दूर करना है। इस अभियान का उद्देश्य ऐसे लोगों के गलत नज़रिये और पूर्वधारणाओं पर सवाल उठाना है जिसकी वजह से वो डिप्रेशन के शिकार लोगों को अलग नज़रिये से देखते हैं।

TLLLF का उदेश्य ऐसे माहौल और सोच का निर्माण करना है, जो ऐसे आंदोलनों को प्रोत्साहित करें। और साथ ही जो लोग मानसिक बीमारी से पीड़ित नहीं भी हैं, वो डिप्रेशन से पीड़ित लोगों का समर्थन करें ताकि समाज में फैले डिप्रेशन और अन्य मानसिक बीमारियों के प्रति कलंक को खत्म किया जा सके।

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