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हेल्थ डेस्क. कैंसर के इलाज की रिसर्च के लिए दो वैज्ञानिकों को मेडिसिन का नोबेल प्राइज दिया गया है। इनमें अमेरिका के जेम्स पी एलिसन (70) और जापान के तासुकू होंजो (76) हैं। शरीर की अपनी ताकत से कैंसर से कैसे लड़ा जाए, दोनों ने इस पर रिसर्च की। कैंसर के परंपरागत इलाज में कैंसर सेल्स को सीधे निशाना बनाया जाता है। दोनों को संयुक्त रूप से 7.27 करोड़ रु. मिलेंगे। 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में नोबेल प्राइज समारोह में उन्हें सम्मान दिया जाएगा। दोनों ने ऐसी इलाज पद्धति विकसित की जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत बने ताकि वह कैंसर ट्यूमर से लड़ सके। उन्होंने ऐसे प्रोटींस की पहचान की जो कैंसर सेल्स को नष्ट करने में इम्यून सिस्टम के आड़े आते हैं।

6 बातें इनकी रिसर्च से जुड़ी…

  1. एलिसन ने 1995 में शरीर में एक प्रोटीन खोजा जो टी सेल्स नामक व्हाइट ब्लडसेल्स को खत्म करता है। इन टी सेल्स की शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बनाए रखने में अहम भूमिका होती है। जाहिर है टी सेल्स के खत्म होने से कैंसर सेल्स को खत्म करने की शरीर की क्षमता कमजोर होती है। यानी हमारे ही शरीर का सीटीएलए-4 नामक प्रोटीन कैंसर से लड़ने में हमारे खिलाफ काम करता है।

  2. जेम्स पी एलिसन पेशे से इम्युनोलॉजिस्ट हैं। कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट साइंसटिफिक एडवाइजरी काउंसिल, अमरीका में बतौर निदेशक काम कर रहे हैं। इनके ज्यादातर शोध कार्य कैंसर से जुड़े रहे हैं और टी-सेल के डेवलपमेंट पर काफी काम किया है। कक्षा 8 में टीचर से काफी प्रेरित होने के बाद साइंस में कॅरियर बनाने का फैसला किया।

  3. ऐसी ही एक रिसर्च होंजो ने लगभग इसी समय की। उन्होंने पीडी-1 नाम का ऐसा प्रोटीन पहचाना जो प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा कैंसर सेल्स को नष्ट करने में आड़े आता था। इस पीडी-1 के खिलाफ एंटीबॉडीज की नई दवा को अमेरिकी एजेंसी ने 2011 में मंजूरी दी जो मैलानोमा के इलाज में कारगर है।

  4. जापान के क्योटो में जन्मे होंजो इम्यूनोलॉजिस्ट हैं। इन्हें साइटोकाइनिन IL-4 व IL-5 और एक्टवेशन इंड्यूस्ड सायटिडीन डीमाइनेज की खोज के लिए जाना जाता है। होंजो को साइंस के क्षेत्र में कई बड़े अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। होंजो ने 1966 में क्योटो यूनिवर्सिटी से एमडी और मेडिकल केमेस्ट्री में पीएचडी की थी।

  5. मैलानोमातब होता है जब त्वचा को रंग देने वाले पिगमेंट कोशिकाओं को कैंसर हो जाता है। लक्षण के तौर पर तिल का आकार बढ़ना, शरीर पर धब्बे से दिखाई दे सकता है। मेलानोमा शरीर पर कहीं भी हो सकता है।

  6. 2015 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर को मैलानोमा कैंसर हुआ था। उन पर इसी थैरेपी से इलाज हुआ और 2016 में वे ठीक भी हो गए। इसमें यह बताना भी उपयोगी होगा कि कैंसर के पारंपरिक इलाज में शरीर साइड इफेक्ट से ज्यादा नुकसान होता है।

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