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हेल्थ डेस्क. भारत में अभी भी भूख एक गंभीर समस्या है। इसका खुलासा ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018 से हुआ है। 119 देशों की सूची में भारत को 103वां स्थान मिला है। 2017 में जारी हुई रिपोर्ट में भारत 100वें और 2016 में 97वें पायदान पर था। आज वर्ल्ड फूड डे है। यह दिन भूख के खिलाफ लड़ाई के तौर पर जाना जाता है। जानिए भारत की स्थिति क्या है…

कैसे हुई वर्ल्ड फूड डे की शुरुआत : संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चरसंगठन की स्थापना 16 अक्टूबर 1979 में हुई थी। इस तारीख कोवर्ल्ड फूड डे के रूप में मनाया जाता है। संगठन की स्थापना यह धीरे-धीरे 150 देशों में मनाया जाने लगा और भूख और गरीबी से जुड़े मुद्दे उठाए गए।

पड़ोसी देशों से पिछड़ा भारत :इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IFPRI) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बच्चों में कुपोषण की उच्च दर से देश में भूख का स्तर इतना गंभीर है और सामाजिक क्षेत्र को इसके प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाने की जरूरत है।ग्लोबल हंगर इंडेक्स – 2018 में भारत की स्थिति नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से भी खराब है। इस साल GHI में बेलारूस टॉप पर है तो वहीं भारत के पड़ोसी चीन को 25वीं, बांग्लादेश को 86वीं नेपाल को 72वीं श्रीलंका को 67वीं और म्यांमार को 68वीं रैंक मिली है। हालांकि पाकिस्तान रैंकिंग में भारत से नीचे से और उसे 106वीं रैंक मिली है।

कैसे तैयार होती ग्लोबल हंगर इंडेक्स :2006 में इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट (आईएफपीआरआई) नाम की जर्मन संस्था ने पहली बार ग्लोबल हंगर इंडेक्स यानी वैश्विक भूख सूचकांक जारी किया था। इसमें देशों को चार प्रमुख संकेतकों के आधार पर रैंकिग दी जाती है। पोषण में कमी, बाल मृत्यू, पांच साल तक के कमजोर बच्चे और बच्चों का कम होता शारीरिक विकास रिपोर्ट के आधार बनाए जाते हैं।

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