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  • हमारा दिल (हृदय)13 सेंटीमीटर लम्बा और 9 सेंटीमीटर चौड़ा लाल रंग का तिकोना, खोखला एवं मांसल अंग होता है, जो पेशीयटिश्यूका बना होता है। यह छाती के बीच में, थोड़ी साबाईं ओर स्थित होता है और एक दिन में लगभग एक लाख बार एवं एक मिनट में 60 से 90 बार धड़कता है। यह एक आवरण द्वारा घिरा रहता है जिसे हृदयावरण कहते है। इसमें पेरिकार्डियल द्रव भरा रहता है जो हृदय की बाहरी आघातों से रक्षा करता है।
  • यह हर धड़कन के साथ शरीर में रक्त को धकेलता करता है। यह हरएक मिनट में 70 मिलीलीटर खूनपम्प करता है। हृदय को पोषण एवं ऑक्सीजन, रक्त के द्वारा मिलता है जो कोरोनरी धमनियों द्वारा प्रदान किया जाता है। यह अंग दो भागों में विभाजित होता है, दायां एवं बायां। हृदय के दाहिने एवं बाएं, प्रत्येक ओर दो चैम्बर (एट्रिअम एवं वेंट्रिकल नाम के) होते हैं।
  • कुल मिलाकर हृदय में चार चैम्बर होते हैं। दाहिना भाग शरीर से दूषित रक्त प्राप्त करता है एवं उसे फेफडों में पम्प करता है और रक्त फेफडों में शोधित होकर ह्रदय के बाएं भाग में वापस लौटता है जहां से वह शरीर में वापस पम्प कर दिया जाता है। चार वॉल्व, दो बाईं ओर (मिट्रल एवं एओर्टिक) एवं दो हृदय की दाईं ओर (पल्मोनरी एवं ट्राइक्यूस्पिड) रक्त के बहाव को निर्देशित करने के लिए एक-दिशा के द्वार की तरह कार्य करते हैं।
  • सामान्यतः एक स्वस्थ व्यक्ति का हृदय एक मिनट में 72 बार धड़कता है लेकिन यह एक पूरी तरह से सही तथ्यनहीं है।कभी कभी हृदय 72 बार से ज्यादा या कम भी धड़क सकता है और इससे व्यक्ति के स्वस्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  • आमतौर पर, एक शिशुका हृदय उसके भ्रूण विकसित होने के 23 दिनों बाद धड़कना शुरू कर देता है।इस क्रिया में माँ का हृदय एक मिनट में 75 से 80बार धड़कता है।

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